हे ! नाग देवता पालागी !
– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी आस्तीन में पलिहा बढ़िहs मनही मन परिभाषा गढ़िहs कुछो जमइहा कबों उखरिहा गारी सीकमभर उचारिहs हे ! नाग देवता पालागी ! हरदम तोसे नेह देवता बसिहा एही गेह देवता नीको नेवर बुझिया भलहीं डसिहा...
Read More– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी आस्तीन में पलिहा बढ़िहs मनही मन परिभाषा गढ़िहs कुछो जमइहा कबों उखरिहा गारी सीकमभर उचारिहs हे ! नाग देवता पालागी ! हरदम तोसे नेह देवता बसिहा एही गेह देवता नीको नेवर बुझिया भलहीं डसिहा...
Read More– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी नइकी शादी छंटल बहुरिया डिस्को झारत भर दुपहरिया भइया फ्रिज में पानी राखस लुग्गा धोवे रोज तिसरिया अब मइया न बलाएँ लेती . बहल गाँव बिलाइल खेती . बइठल दुअरे बब्बा रोवें घरवां दादी बरतन...
Read More– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी टीभी के परिचरिचा देखs अस लागे, गोंइठा घी सोखे। आन्हर कुकुर बतासे भूंके।। मिलत जुलत सभही गरियावत पगुरी करत सभे भरमावत पुतरी नचावत मुँह बिरावत एहनिन के अब मुँह के रोके। आन्हर कुकुर बतासे भूंके।। छऊँक...
Read Moreपिछला 15 मई का दिने पूर्वांचल भोजपुरी महासभा का तरफ से हिन्दी भवन, ग़ाज़ियाबाद में एगो भव्य राष्ट्रीय कवि सम्मेलन आयोजित कइल गइल जवना क सफलता देखा दिहलसि कि भोजपुरी के चाहे वाला पूर्वांचले ना देश के हर कोना में भरल बाड़ें. सुनवइयन...
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