टैग: जुगेसर

भोजपुरी उपन्यास "जुगेसर" – 5

– हरेन्द्र कुमार पाण्डेय अबले जवन पढ़नी ओकरा आगे …) घर का फोन में एसटीडी रहे. पूजा नम्बर मिलावे लगली. दूनो बच्चा दूर पलंग पर बैठ के शून्य में निहारे लगले. विपत्ति महसूस करेके क्षमता बच्चन में बड़कन से अधिके होला. बहुते...

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भोजपुरी उपन्यास "जुगेसर" – 4

– हरेन्द्र कुमार पाण्डेय अबले जवन पढ़नी ओकरा आगे …) मुजफ्फरपुर इमलीचट्टी होके ऊ यूनिवर्सिटी पहुंचलन. उहां केमिस्ट्री विभाग में गइलन. विभागाध्यक्ष के कमरा बंद रहे. ऊ अर्दली से पुछलन – ‘डॉ.शाही ?’...

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भोजपुरी उपन्यास "जुगेसर" – 3

– हरेन्द्र कुमार पाण्डेय अबले जवन पढ़नी ओकरा आगे …) सब लोग के पहिला गिलास खतम होखे पर आइल. सबकर नजर जुगेसर के भरल गिलास पर पड़ल. एक साथे सभे बोल उठल – ‘पहिला खतम कइल जाव. फेर इच्छा होई त लेब.’ जुगेसर...

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भोजपुरी उपन्यास "जुगेसर" – 2

– हरेन्द्र कुमार पाण्डेय अबले जवन पढ़नी ओकरा आगे …) -‘अरे योगेश्वर, कहां घुम तार?’ ऊ कहलन. -‘सर प्रणाम. हम समस्तीपुर जैन स्कूल में ज्वाइन कइले बानी. महीना भर भइल. रउरा कब से हईं इहां?’...

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भोजपुरी उपन्यास "जुगेसर" – 1

– हरेन्द्र कुमार पाण्डेय योगेश्वर नाम रखले रहस उनकर मास्टर चाचा जवन कलकाता में पढ़ावत रहस. स्कूल में भरती का समय राउत जी मास्टर साहेब ठीक (!) कइलन युगेश्वर. लेकिन गांव में सबका खातिर उ जिंदगी भर आ मरलो के बाद जुगेसरे रहस....

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