सखी Posted by Editor | जुलाई 3, 2014 | कहानी, साहित्य | – डा॰ गोरख प्रसाद मस्ताना लोर से भरल आँख अउरी मुँह पर पसरल उदासी साफ साफ झलका देला कि कवनो परानी दुख में केतना गोताइल बा. बेयाकुल चिरई के बोली में चहचहाहट ना होला, बस बुझवइया के समझला के फेर हऽ. एही लेखा-जोखा में नीतू के... Read More
पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..