निरउठ Posted by Editor | अगस्त 4, 2015 | सतमेझरा | – डा. अशोक द्विवेदी दिल्ली फजिरहीं पहुँच गउवीं. तर-तरकारी कीने क बेंवत ना बइठुवे त सोचुवीं आलुवे-पियाज कीनि लीं. दाम पुछते माथा घूम गउवे. साठ रुपिया किलो पियाज रे भइया. हम सोचुवीं..”बकसs ए बिलार ,मुरुगा बाँड़े होके... Read More
पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..