भैरवी क साज
– ईश्वरचन्द्र सिन्हा सिंहवाहिनी देवी के सालाना सिंगार के समय माई के दरबार में जब चम्पा बाई अलाप लेके भैरवी सुरू कइलिन, त उहाँ बइठल लोगन क हाथ अनजाने में करेजा पै पहुँच गयल. रात भर गाना सुनत-सुनत जे झपकी लेवे सुरू कय देहले...
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Read MorePosted by Editor | Mar 31, 2015 | पुस्तक चर्चा, साहित्य |
अभाव आ गरीबी पहिलहूँ रहे. दुख-दलिद्दर अइसन कि रगरि के देंहि क चोंइटा छोड़ा देव. लोग आपुस में रोइ-गाइ के जिनिगी बिता लेव, बाकिर मन मइल ना होखे देव. हारल-थाकल जीव के प्रेमे सहारा रहे. धीरज आ बल रहे. आजु एतना तरक्की आ सुबिधा-साधन का...
Read More“‘पाती’ पत्रिका भोजपुरी रचनाशीलता के आंदोलन के क्रांति-पताका हऽ. ‘पाती’ माने, नयकी पीढ़ी के नाँवे सांस्कृतिक चिट्ठी. एगो चुपचाप चले वाला सांस्कृतिक आंदोलन हवे ‘पाती’, जवना के अशोक द्विवेदी अपना संसाधन से चुपचाप चला रहल...
Read More– प्रगत द्विवेदी हमनी के भोजपुरिया लोगन में कम ‘क्रियेटिविटी’ नइखे. जोगाड़ पर काम चलावे आ लोके-लहावे के चलन हमनी क खासियत मनाला. हमनी में से कतने लोग बिना सुबिधा संसाधन आ बे साज-समान के अतना गजब का ऊँचाई प चहुँपल कि देखि के...
Read MorePosted by Editor | Jan 3, 2015 | पुस्तक चर्चा, भाषा, साहित्य |
– अशोक द्विवेदी पत्रिका के 74वाँ अंक रउवा सभ के सामने परोसत हम अपना स्रम के बड़भागी मान रहल बानी जे 1979 से जूझत-जागत, ठोंकत-ठेठावत हमनी का पैंतीसवाँ बरिस में चलि अइली जा। एह यात्रा में, सँग-सँग कुछ डेग चले वाला हर...
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