माई बाप अउर सुख दुख

– पाण्डेय हरिराम जिनगी माई के अँचरा के गाँठ जइसन होले. गाँठ खुलत जाले. कवनो में से दुख त कवनो में से सुख निकल आवेला. हमनी का अपना दुख में भा सुख में भुलाइल रहीले. ना त माई के अँचरा याद रहेला ना ओह गाँठ के खोल के माई के...

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