Tag: भोजपुरी गीत

का बाँचल बा गाँव में

– शशि प्रेमदेव ना सनेहि के छाँव, न ममता के आँचर बा गाँव में! का जाई उहवाँ केहू अब, का बाँचल बा गाँव में? छितिर बितिर पुरुखन के थाती, बाग-बगइचा, खपड़इला! खरिहानी में जगहे-जगहा जीव जनावर के मइला! ना कजरी के गूँज, ना फगुआ के...

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बलिया में लोकरस के सरिता बहल

मंगल के साँझ बलिया के लोग बापू भवन, टाउन हॉल, में भोजपुरी लोकरस में देर रात ले डूबल उतराइल. भोजपुरी गीतन से फूहड़पन हटावे का अपना अभियान के रचनात्मक तरीका से परंपरागत भोजपुरी गीतन के फेर से जीयतार बनावे का मकसद से बलिया के एगो...

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भोजपुरी गीतन में फूहड़ता

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल हम छुट्टी ना रहला का कारन गायन के गिनल-चुनल कार्यक्रम दिहींले. एहसे जहाँ गावल असहज लागी, ओहिजा पहिलहीं मना कऽ दिहींले. पहिलहीं जानकारी ले लिहींले कि कवना तरह के प्रोग्राम बा आ के-के आवऽता. ठीक...

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