Tag: भोजपुरी

महँगिया के मार

– ओ.पी. अमृतांशु कईसे सहबू महँगिया के मार करीमन बहू राम के भजऽ. खरची ना जुटेला भोजनवा, देलू पाँच गो रे बेटी के जनमवा, आइल छठवा गरभवा कपार करीमन बहू राम के भजऽ. डहकेली छछनेली बेटिया, बिलखत बाड़ी दिने-रतिया, चढ़ल अदहन पे होखे...

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कबो टूटे ना भाईचारा

– नूरैन अंसारी मत मजहब के मापदंड बनायीं आदमी के पहचान के. ना त बहुत बड़ा अपमान होई गीता अउर कुरान के. प्रेम अउर भाईचारा त हर एक धरम के सार ह. इ जात-पात अउर उंच-नीच के बहुत बड़ा उपचार ह. अपना देश के सभ्यता-संस्कृती इहे मूल...

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मामिला बड़का हाकिम का लगे बा

आ जब मामिला बड़का हाकिम का लगे रहो तब आपन मुँह खोलल आ शेर का माँद में मूड़ी घुसावल एके बाति होला. एहसे हम त कुछ बोलब ना. वइसहूं अनका के फटला में आपन गोड़ ना फँसावे के चाहीं. मुद्दई आ मुद्दालह एक ओरि हो गइल बाड़े. पूरा मामिला का...

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मूस के सीख आ शेर के तमेचा

– जयंती पांडेय ई जान जा भाई, मूस चाहे जवना पार्टी में होखो बाकिर सलाह दिहला से बाज ना आवे. ऊ अपने चाहे जवन करऽ सन बाकिर ई ना चहिहें सन कि लोगो ऊहे करो. अइसने एगो मूस जंगल में भाषण ना दे के सलाह दिहला के सरकारी मिशन पर...

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कहाँ जात बा संसार

– नूरैन अंसारी आजकल काहे लोगवा खुद से नाराज लागत बा. बड़ा बदलल-बदलल सबकर मिजाज लागत बा. लोग मवुरा के बिगड़ले बा मुहवा के रौनक, बुझाता हंसला पर कौनो बेयाज लागत बा. अपने घर में लोगवा काटत बा बनवास, गरज के मारल इ पूरा समाज...

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