Tag: भोजपुरी

समय के चक्कर

– मनिर आलम सब ख़ुशी बा लोग के दामन में. बाकिर हंसी खातिर समय नइखे. दिन रात घूमत दुनिया में. जिनिगी खातिर समय नइखे. महतारी के लोरी के एहसान सब के बा. बस महतारी कहे खातिर समय नइखे. सब नाता रिश्ता त मर चुकल बा. अब ओके दफनावे...

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मेहरारुअन के जतन से बचल बिया भोजपुरी

– आशुतोष कुमार सिंह देश-दुनिया में आपन पांव पसार रहल भोजपुरी दिन-प्रतिदिन अपना देश में आपन संविधानिक अधिकार के नियरा पहुंच रहल बिया. हाले में जहवां भोजपुरी के आठवां अनुसूची में डाले खातिर संसद के भितरी जमके बहस भइल. अउर...

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महँगिया के मार

– ओ.पी. अमृतांशु कईसे सहबू महँगिया के मार करीमन बहू राम के भजऽ. खरची ना जुटेला भोजनवा, देलू पाँच गो रे बेटी के जनमवा, आइल छठवा गरभवा कपार करीमन बहू राम के भजऽ. डहकेली छछनेली बेटिया, बिलखत बाड़ी दिने-रतिया, चढ़ल अदहन पे होखे...

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कबो टूटे ना भाईचारा

– नूरैन अंसारी मत मजहब के मापदंड बनायीं आदमी के पहचान के. ना त बहुत बड़ा अपमान होई गीता अउर कुरान के. प्रेम अउर भाईचारा त हर एक धरम के सार ह. इ जात-पात अउर उंच-नीच के बहुत बड़ा उपचार ह. अपना देश के सभ्यता-संस्कृती इहे मूल...

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मामिला बड़का हाकिम का लगे बा

आ जब मामिला बड़का हाकिम का लगे रहो तब आपन मुँह खोलल आ शेर का माँद में मूड़ी घुसावल एके बाति होला. एहसे हम त कुछ बोलब ना. वइसहूं अनका के फटला में आपन गोड़ ना फँसावे के चाहीं. मुद्दई आ मुद्दालह एक ओरि हो गइल बाड़े. पूरा मामिला का...

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