जब घूर के दिन फिरेला
– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद से रामचेला पूछले, ‘बाबा हो, ई घूरो के दिन कइसे फिरेला?’ बाबा कहले, ‘जे तहरा एकर उत्पत्ति आ टीपण जाने के होखो त भोजपुरिका में बतकुच्चन करे वाला डाक्टर साहेब से सवाच ल. हम त...
Read More– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद से रामचेला पूछले, ‘बाबा हो, ई घूरो के दिन कइसे फिरेला?’ बाबा कहले, ‘जे तहरा एकर उत्पत्ति आ टीपण जाने के होखो त भोजपुरिका में बतकुच्चन करे वाला डाक्टर साहेब से सवाच ल. हम त...
Read More– प्रिंस रितुराज दुबे ईहां कवनो एल्बम के गाना नइखे लिखल जात, ई एगो साच कथन मनोज तिवारी जी के एल्बम से लिहल गइल बा. भोजपुरी, जवन पूरा दुनिया में अपना मौजूदगी के ताल ठोकत बा, ओही भोजपुरी के जनमे स्थान में हार हो गइल बा. जहाँ...
Read Moreविश्व भोजपुरी सम्मेलन के बलिया इकाई अउर पाती सांस्कृतिक मंच के एगो बड़हन आयोजन पिछला अतवारा का दिने बलिया के टाउन हाल बापू भवन में भइल. एह आयोजन के पहिला सत्र में पाती संपादक डा॰ अशोक द्विवेदी, प्रो॰ अवधेश प्रधान आ प्रो॰ सदानन्द...
Read More– रामवृक्ष राय ‘विधुर’ जवार भर में केहू के मजाल ना रहे कि भोला पहलवान का सोझा खड़ा होखे. जब ऊ कवनो बाति पर खिसिया के सनकी हाथी नीयर खड़ा हो जासु त नीमन-नीमन नवहन के साँसि फूले लागे. मीठू ओस्ताद का अखाड़ा में बइठक करे लागसु त...
Read More– कुलदीप कुमार कहे के त कहल जाला कि जवन भासा रोजगार के मौका ना दिआ सके ओह भासा के अस्तित्व गँवे-गँवे खतम हो जाला. बाकिर ई बाति भोजपुरी प का साथे ठीक नइखे बइठत. सीधा से देखीं त अबहीं ले भोजपुरी के संवैधानिक दर्जा नइखे मिलल...
Read More