बनचरी (दुसरकी कड़ी)
– डा॰ अशोक द्विवेदी भयावह आ भकसावन लागे वाला ऊ बन सँचहूँ रहस्यमय लागत रहे. जब-तब उहाँ ठहरल अथाह सन्नााटा अनचीन्ह अदृश्य जीव जन्तु भा पक्षियन का फड़फड़ाहट से टूट जात रहे. थोरिके देर पहिले फेड़ का एगो लटकल डाढ़ि से लपटाइल लटकल...
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