कांच कोइन
– संतोष कुमार ‘इहाँ हमरा से बड़का हीरो कवनो बा का ? हम अभिए चाहीं त निमन निमन जाने के ठीक कर दीं’ – किसुन दारु पी के अपना घर के दुअरा पर पैतरा कइले रहलन. आपन मेहरारू के हांक लगावत कहलें – ‘का...
Read More– जयंती पांडेय नेताजी भाजपा के हाहर में जीत गइले आ मंत्रियों हो गइले. जहां उनका बंगला मिलल ओह में एगो कटहर के पेड़ रहे. मंत्री जी रोज सबेरे उठि के गाछ पर के कटहर गिनस. एक दिन अचके में लगले चिलाये कि गाछि पर काल्हु ले एगारह...
Read More– जयंती पांडेय रामचेला लइकन के बतावत रहले कि अंधेर नगरी के माने का होला. ओकरा खातिर जरूरत होला चौपट राजा के. बिना चौपट राजा के अंधेर नगरी होइये ना सके. तले बाबा लस्टमानंद कहले हो राम चेला ई कहानी सब पुरान जमाना के ह आ...
Read More– जयंती पांडेय लस्टमानंद के नतिया लोअर इस्कूल में पढ़त रहे आ कहत रहे अंकल माने चाचा, मामा, फूफा. उनका आपन दिन याद आ गइल. उहो त इहे पढ़ल रहले. जब ऊ पढ़त रहले त अंग्रेजी पढ़ल मास्टर के बड़ा रुतबा रहे. ऊ मैट्रिक पास रहे बाकी...
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