Tag: भोजपुरी

लोक कवि अब गाते नहीं – आखिरी कड़ी

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) बीसवाँ कड़ी में भोजपुरी के दुर्दशा पर लोक कवि के दुख पढ़ले रहीं अब पढ़ीं एह उपन्यास के आखिरी कड़ी ….. अबहीं ठीक से भोर भइलो ना रहल कि लोककवि के फोन के घंटी...

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अखबार के मोकबिला इंटरनेट से

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद गाँव से कोलकाता अइले. इहाँ उनुका एक जाना प्रोफेसर भेंटइले. जइसन नाँव वइसन सुभाव. नांव किरपा जी आ सुभावो एकदम किरपालु. बाबा से बतियावत में उनका से दोस्ती हो गइल. पता चलल कि ऊ प्रोफेसर साहेब...

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मवेशी डाक्टर के साँसत

– जयंती पांडेय एक हाली मास्टर काली सिंह इस्कुल से लवटत रहले. उनका कवनो बात के बतंगड़ बना के कुछ ना कुछ करत रहे के आदत ह. हठात ब्लॉक के सामने मवेशी डाक्टर साहेब के दवाखाना में ढूकि गइले. रामचेला आ बाबा लस्टमानंद अपना कवनो...

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अब छपरा में घूमी अमेरिका के गोइना

– जयंती पांडेय हमरा बिहार के मुख्यमंत्री जी जबसे भाजपा के संगत छोड़ले तबसे रोज कवनो ना कवनो बवाल में फंसल जातारें. अबहीं मोदी के ममिला सुलझल ना रहे कि तड़ दे मिड डे मील के कांड हो गइल. बेचारू के ना में दम आ गइल बा. ई सूचना...

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