Tag: भोजपुरी

पुलिस के नाक कटला से बचाईं

– जयंती पांडेय एक दिन एगो प्रोफेसर साहेब, उनकर नांव ह रवींद्र पाठक जी, बिहार के सिवान जिला से आ के लस्टमानंद से भेंट कइले. बाते बात में पुलिस पर चर्चा चलि गइल त पाठक जी बड़ा दुखी हो के बतवले ‘आजुओ काल पुलिस के बारे में लोग...

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भोजपुरी के विकासमान वर्तमान

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल अपना प्रिय अंदाज, मिसिरी के मिठास आ पुरुषार्थ के दमगर आवाज का कारन भोजपुरी शुरुए से आकर्षण के केंद्र में रहल बिया. भाषा निर्भर करेले विशेष रूप से भौगोलिक कारन आ बोलेवाला लोगन के आदत, रुचि आ...

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नेता के जबान आ आपन देश

– जयंती पांडेय आजु काल्हु , जान जा ए रामचेला कि नेता लोगन के जबान बिछला जा तिया. कहले बा कि चाम के जीभ ह, बिछला जाले. लेकिन नेता लोगन के जीभ सबसे जियादा बिछलाले. खास क के जब चुनाव के पहिले वाला मौका होखो. अब देखऽ ना कि दू...

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जे हंसे ना ऊ..?

– जयंती पांडेय ई त केहु विज्ञानीए बता सकेला कि तीनूं तिरलोक में आदमी के अलावा कवन प्राणी हंसेला. लेकिन ई त तय बा कि गदहा बिल्कुल ना हंसेला. बाबा लस्टमानंद के बात सुनि के राममचेला कहलें, ऊ जे गदहा कभी-कभी हंसत अइसन लागेला...

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ई न भइल बात

– जयंती पांडेय अबहीं दिन चढ़ल शुरूए भईल रहे आ घामो अब तपल शुरु हो गइल रहे कि रामचेला बाबा लस्टमानंद के मड़ई में अइलें. उनका कांखि में एगो अखबार दबाइल रहे. ऊ अखबार निकाल के बाबा के दिहले. बाबा पढ़ल शुरू कइलें. ओह में लिखल...

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