Tag: भोजपुरी

तरह – तरह के दंगल

– जयंती पांडेय हमरा देश में तरह – तरह के दंगल होला. कहीं लईकन के त कहीं साढ़न के आ कहीं पहलवानन के. लेकिन अबले केहु अनशन के दंगल ना सुनले होखी. लेकिन अपना देश में ई होला. एकर जे पैदाइश के पता लगावे केहु चली तऽ चलत...

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लोक कवि अब गाते नहीं – १५

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) चउदहवाँ कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं कि गोपाल पंडित के बेटी के बिआह खातिर लोक कवि रुपिया त दे अइलन बाकिर बिआह ठीक ना हो पावल. सिरिफ पइसा भर से केहु के शादी ब्याह तय...

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आजु काल्हु बेईमान लोग बड़ा परसान बा

– जयंती पांडेय बेचारा बेईमान लोग बड़ा परसान बा रामचेला. ससुरा ईमानदार लोग ऊ लोग के बड़ा परसान करऽ ता. केहु धरना दे ताऽ, केहु प्रदर्शन करऽ ता आ केहु तऽ अनशन पर बईठ जा ताऽ. बईमान लोग परसान हो गईल तऽ एगो मदारी पासवान के...

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शिक्षा त अब धंधा बनल जा ता

– जयंती पांडेय जान जा भाई रामचेला, अब त शिक्षा जइसन पुण्य कामो धंधा बनत जा ता. जब से सेठ साहूकार लोग के ई बुझाइल कि पढ़ा के बड़हन आदमी बनावे के सपना बेचल जा सकेला तबसे ऊ लोग शिक्षा में हाथ गोड़ चलावे लागल लोग. पहिले सेठ लोग...

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भ्रष्टाचार माने मलाई मारे के परमानेंट सोर्स

– जयंती पांडेय आजु करप्शन के नांव पर उहे लोग हो-हल्ला मचा रहल बा, जेकरा करप्ट होखे के मौका ना मिलल. जसहीं मौका मिली, ऊ आपन ओठ सी लिहें. ई रीति जमाना से स चलि आ रहल बिया. लोग भ्रष्टाचार के विरोध करत समय ई ताक में लागल रहे...

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