Tag: पाती

निरउठ

– डा. अशोक द्विवेदी दिल्ली फजिरहीं पहुँच गउवीं. तर-तरकारी कीने क बेंवत ना बइठुवे त सोचुवीं आलुवे-पियाज कीनि लीं. दाम पुछते माथा घूम गउवे. साठ रुपिया किलो पियाज रे भइया. हम सोचुवीं..”बकसs ए बिलार ,मुरुगा बाँड़े होके...

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कबहुँ न नाथ नींद भरि सोयो

– कमलाकर त्रिपाठी बाँके बिहारी घर से दुई-तीन कोस चलल होइहँ कि ओनकर माई चिल्लइलिन, ”रोका हो गड़िवान, दुलहिन क साँस उल्टा होय गइल.“ बाँके लपक के लढ़िया के धूरा पर गोड़ राखि के ओहार हटाय के तकलन – ”का भइल रे?“ ”होई का ए...

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लाल निशान

– बिन्दु सिन्हा किर्र…. दरभंगा सकरी रोड पर सन्नाटा भइला से बस आउर ट्रक के चाल अइसहीं तेज हो जाला. झटका से ब्रेक लेला से खूब तेज चलत ट्रक एक-ब-एक किरकिरा उठल. ट्रक का डाला पर बइठल खलासी बीड़ी पीयत कवनो फिल्मी धुन...

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प्रेम के सुभाव

– रामदेव शुक्ल मीतू हम दूनू जने उहाँ पहुंचि गइल बानी जाँ, जहाँ से लवटले के कवनो राहि नइखे बँचल। अगहीं बढ़े के बा, चाहे एहर बढ़ि चलल जा, चाहे ओहर। बोलऽ कवने ओर चलल जाव? मीता के लिलार चमकि उठल। कहली- ”तहार कहल आ हमार सूनल, ई...

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रोेजे सुख के साँझ निहारत, जागेला भिनसहरे गाँव

भोजपुरी के रूप-रंग, सुभाव, संघर्ष आ कबो हार ना माने के प्रवृति ओकर आपन खासियत ह. नियतु आ भ्रष्टाचार का पाटन में पिसा, श्रम संघर्ष आ जिजिविषा का बूते उठ खड़ा होखे वाला भोजपुरिहा जइसे अपना भासा में प्रेम आ उल्लास के छन ना भुलाले...

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