Tag: बतकुच्चन

चिन्ता में झटकल जात एह देश के राजनीतिक जमात (बतकुच्चन – ११८)

बरखा के मौसम बा. झटास झटहा जस लागे लागत बा. बरखा के पानी के बौझार जब हवा के झोंका से उड़ के एने ओने आवेला त ओकरा के झटास कहल जाला. . झटास संगे आइल पानी के बूंद कबो कबो चोट जइसन लागेला बुझाला कि केहु झटहा चला के मारत बा. झटहा छोट...

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आफत बिपत के चरचा (बतकुच्चन ‍- ११७)

पिछला दस दिन से बस एकही चरचा चलत बा देश भर में आ उ चरचा बा आफत बिपत के. आपदा बिपदा से निकलल शब्द आफत बिपत कुछ लोग संगे विशेषणो का रूप में इस्तेमाल होखेला. जइसे कि आजुकाल्हु एगो नेता के नाम बाकी गोल वाला नेता आ पोसुआ मीडिया ला...

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भोजपुरी सोगहगे बिला मत जाव (बतकुच्चन – ११६)

हालही मे एगो विद्वान लेखक के पढ़त रहनी. उनुका लेख में सोगहग के चरचा आइल त उहाँ के लिखले बानी कि शायद सोगहग के जनम संस्कृत के सयुगभाग से भइल जवना के मतलब होला दुनु हिस्सा समेत पूरा. बाकिर हमार बतकुचनी सुभाव के एहसे तोस ना मिलल आ...

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आ दुर्रऽऽऽ, हमरा कवन काम बा केहु से कहला के? (बतकुच्चन – ११४)

आ दुर्रऽऽऽ, हमरा कवन काम बा केहु से कहला के? हर गाँव में अइसनका एगो फुआ भा काकी जरूर मिल जइहें जिनकर कामे होला एने के बात ओने चहुँपावल आ गाँव भर के चुहानी घूमल. राजनीति आ मीडियो में अइसनका लोग के कमी ना मिले. ई लोग जवन बात कहे...

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अलबल करे खातिर अलबलाह होखल जरूरी ना होला ( बतकुच्चन – ११३)

सट्टा से अबहींओ टीवी चैनल वइसहीं सटल बाड़ें बाकिर हमरा एक बात समुझ में नइखे आवत कि खेत खइलसि गदहा आ मार खइलसि जोलहा वाला कहाउत एह बात पर काहे सटीक बइठत बा. कइल केहु आ भरी केहु दोसर, से काहे? होखे के त चाहत रहुवे कि आईपीएल के...

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