बाबूजी सिखवले
– गनेश जी “बागी” बाबूजी सिखवले दुःख सहीहs अपार, कबो ना करीहs बबुआ, केकरो प वार, गलती ना करीहऽ अइसन, पिटे पड़े कपार, दुनिया में कुछु ना रही, रह जाई बस प्यार. बहुते आसान होला, दिल के दुखावल, दोसरा के कइला में,...
Read More– गनेश जी “बागी” बाबूजी सिखवले दुःख सहीहs अपार, कबो ना करीहs बबुआ, केकरो प वार, गलती ना करीहऽ अइसन, पिटे पड़े कपार, दुनिया में कुछु ना रही, रह जाई बस प्यार. बहुते आसान होला, दिल के दुखावल, दोसरा के कइला में,...
Read MorePosted by Editor | Jul 13, 2010 | भोजपुरिया लाल, सरोकार |
– आशुतोष कुमार सिंह सुंदर सुभूमि भैया भारत के देसवा से, मोर प्रान बसे हिम-खोह रे बटोहिया एक द्वार घेरे राम हिम-कोतवलवा से, तीन द्वार सिंधु घहरावे रे बटोहिया. ई गीत के सुनते मन में एगो गजब के आनंद के अनुभूति होखेला. भोजपुरी...
Read More– अभयकृष्ण त्रिपाठी बढ़िया रहीत दुनिया में अन्हरिये बनल रहीत करिया चेहरा दुनिया से दरकिनार रहीत. याद आवेला जब सारा जग उजियार रहे, सोन चिरईया के नाम जग में बरियार रहे, मुँह में मिश्री आँखिन में आदर भरमार रहे, स्वर्ग से...
Read More– आशुतोष कुमार सिंह पिछला रात हम नीमन से सुत ना पइनी. अंघीए ना लागल. घर से लेके दफ्तर तक के टेंशन हमरा नींद में बाधा उत्पन्न क देले रहे. रात में जब हमरा नींद ना आवत रहे तब हम ई सोचत रहीं कि ऊ दिन केतना नीमन रहे, जब चांद के...
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