महतारी
– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी आजु निकहे बिखियाइल बानी माई बचवन पर नरियात नरियात लयिकवो मुरझा गईलें आँखिन के लोर थम्हात नइखे फेरु अझुराइल नोचब बकोटब खिलखिलात, हंसत, मुस्कियात केतना रंग , केतना रूप . झुंझलात, अकबकात कुछो अभियो...
Read More– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी टीभी के परिचरिचा देखs अस लागे, गोंइठा घी सोखे। आन्हर कुकुर बतासे भूंके।। मिलत जुलत सभही गरियावत पगुरी करत सभे भरमावत पुतरी नचावत मुँह बिरावत एहनिन के अब मुँह के रोके। आन्हर कुकुर बतासे भूंके।। छऊँक...
Read Moreभोजपुरी समाज, दिल्ली का तरफ से बोलावल एगो अनौपचारिक मुलाकात में भोजपुरी भाषी सांसदन आ पत्रकार लोग जुटल. एह मुलाकात से राय निकलल कि यूपी विधानसभा के अगिला बरीस होखे जात चुनाव में मुद्दा बनवला क जरुरत बा. बइठक में भोजपुरी समाज,...
Read Moreकलाकार के भीतर छुपे हुए हुनर को लोगो तक पहुचने में देर बिलकुल नहीं लगती. इसका सीधा साधा उदाहरण है गायिका पुष्पलता, जिन्होंने अपनी सुरीली आवाज़ में कई मधुर गीत लोगो के मनोरंजन के लिये गा चुकी हैं! कोलकाता की रहनेवाली पुष्पलता की...
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