Tag: भोजपुरी

फूहड़ता लेके खाली भोजपुरी के बदनामी काहे.. भाग २

– अभय कृष्ण त्रिपाठी “विष्णु” जमाना लाख बुरा चाहे त का होला, उहे होला जे मंजूरे खुदा होला. निकलल बानी सर कफ़न बांध के याद रखीह, मिट जाई हर रावन बस लक्ष के धियान धरीह, बा सेवा के इरादा त बोली के दरकिनार करीह,...

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फूहड़ता लेके खाली भोजपुरी के चर्चा काहे…

<h3>- अभय कृष्ण त्रिपाठी “विष्णु”</h3> कबो ई सवाल हमरा मन में बारी-बारी घुमे बाकि काल पुरान मित्र डॉक्टर ओमप्रकाश जी के सन्देश से फिर से ताजा हो गइल. सवाल जेतना आसान बा जवाब ओतना आसान नइखे काहे से कारन...

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कबहुँ न नाथ नींद भरि सोयो

– कमलाकर त्रिपाठी बाँके बिहारी घर से दुई-तीन कोस चलल होइहँ कि ओनकर माई चिल्लइलिन, ”रोका हो गड़िवान, दुलहिन क साँस उल्टा होय गइल.“ बाँके लपक के लढ़िया के धूरा पर गोड़ राखि के ओहार हटाय के तकलन – ”का भइल रे?“ ”होई का ए...

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लाल निशान

– बिन्दु सिन्हा किर्र…. दरभंगा सकरी रोड पर सन्नाटा भइला से बस आउर ट्रक के चाल अइसहीं तेज हो जाला. झटका से ब्रेक लेला से खूब तेज चलत ट्रक एक-ब-एक किरकिरा उठल. ट्रक का डाला पर बइठल खलासी बीड़ी पीयत कवनो फिल्मी धुन...

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फेस बुक के दुखिया

– जयंती पांडेय ओह दिन साइत बिगड़ल रहे कि आंगछ खराब रहे. गाँव के लरिका मधुमाछी के छत्ता में ढेला मार के परइले सन. ओने रामचेला जेठ के दुपहरिया में पछुआ के झोंका के कम करे खातिर आँख मुलमुलावत पेड़ का नीचे आगे के ठाड़ भइल...

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