Tag: भोजपुरी

पाकिट में दाम नईखे तऽ राउर कवनो मान नइखे

– जयंती पांडेय ‘एगो कहावत बा कि पाकिट में दाम नइखे तऽ राउर कवनो मान नइखे। गांव में कहल जाला कि मरद के मरद रुपिया हऽ ना तऽ सब मरद के मर्दानगी बेकार. काल कई जगहि चुनाव के रिजल्ट आइल. बड़े बड़े ज्ञानी लोग कहल कि भ्रष्टाचार के...

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मनोज भावुक के पूर्वांचल गौरव सम्मान

भोजपुरी साहित्यकार मनोज भावुक के पूर्वांचल भोजपुरी महासभा, गाज़ियाबाद पिछला 10 मार्च, 2012 के अपना सबले प्रतिष्ठित अवार्ड पूर्वांचल गौरव सम्मान से सम्मानित कइलसि. भोजपुरी के तमाम संस्थन का बीच साहित्यिक आ सांस्कृतिक संबंध मजबूत...

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फागुन के तीन गो गीत

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल एक लागेला रस में बोथाइल परनवा ढरकावे घइली पिरितिया के फाग रे ! धरती लुटावेली अँजुरी से सोनवा बरिसावे अमिरित गगनवा से चनवा इठलाले पाके जवानी अँजोरिया गावेला पात पात प्रीत के बिहाग रे. पियरी पहिरि...

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अब कवना कवना बात खातिर मुँह लुकावल जाव

– जयंती पांडेय शरम कहीं चाहे लाज, इहो कतना तरहि के होला. अबही हालही के बाति ह कि अमरीका गोंड़ के बेटी दरोगा राय के बेटा संगे भाग गइल. अब अमरीका गोंड़ कइसे लाजे मुंह देखइहें. अइसहीं राष्ट्रीय शर्मो तरह- तरह के होला. बाबरी...

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भइल बियाह मोर अब करब का ?

– जयंती पांडेय बड़ा ढेर दिन के बाद रमचेलवा फेरू लउकल. रमचेलवा के संगे-संगे दो-चार जाना अउर रहलें. बुझाइल कि रमचेलवा ए घरी नेतागीरी करे लागल बा. बाकी अपना गुरु लस्टमानंद के देख के रमचेलवा मानो गोड़े पर ढह पड़ल. सांच कहीं तऽ...

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