Tag: भोजपुरी

लोक कवि अब गाते नहीं – १०

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) नवीं कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं सावन का बरखा में राधा में मोहन के रसे रसे बरसल. फेर राधा रुपी धाना के बिआह आन गाँवे होखल, मोहन के अपना गवनई का चलते धीरे धीरे नाम...

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भ्रष्ट लोगन के डिमांड

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद आ रामचेला हरान बाड़े ई जान के कि उनहुं के नेताजी के एगो स्विस बैंक एकाउंट बा. ऊ त आजु काल्हु भ्रष्टाचार पर बयान सुन के हरान बाड़े. बयान अइसन गिरऽता जइसे नेतवन के ईमान, इनकर गिरऽता उनकर गिरऽता....

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ये  दुलहा

– ओ.पी .अमृतांशु पाकल मोछवा बोकावा के पोंछवा रुपवा गोबरे लिपावल ! ये  दुलहा. माथे मउरवा सजावल ! ये  दुलहा. अइलऽ गदहिया पे, नाहीं तू नहइलऽ, आखीं कजरवा ना माई से करइलऽ, उबड़-खाबड़ बाटे लिलारवा चूनवा वोही पे टिकावल...

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सब झगड़ा जर जोरू आ जमीन के हऽ

– जयंती पांडेय रामचेला बाबा लस्टमानंद से पूछले कि आजुकाल्ह आतना झगड़ा काहे बढ़ गइल बा. बाबा खखार के कहले, बड़ बूढ़ लोग कहि गइल बाड़े कि दुनिया भर के झगड़ा जर जोरू आ जमीन के ले के होला. इहवां जर माने सोना चांदौ आ रुपिया पइसा के...

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नेता बने के आइडिया तियाग दिहले रामचेला

– जयंती पांडेय जबसे पाँच राज्यन में चुनाव भइल तबसे रामचेला बड़ा मायूस हो गइले. मुँह सुथनी अस बना लिहले आ चेहरा ओल अस लटका लिहले. बाबा लस्टमानंद के बड़ा माया लागल. लगे जा के पूछले का, हो रामचेला ! बड़ा उदास लागत बाड़ऽ ? ऊ...

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