भोजपुरी गजल
– मनोज भावुक (१) सर से हाथ हटा के देखीं , हाथ-पैर चला के देखीं, कुछ ना कुछ रस्ता निकली,बुद्धि के दउरा के देखीं पहिले त उठ्ठीं-जागीं, फिर आलस के कंबल फेकीं मन जरूर फरहर होई, दाढ़ी बाल बनवा के देखीं दूध के धोवल केहू नइखे ,सब...
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Read Moreभोजपुरी शायर मनोज भावुक के शायरी पर बनल भोजपुरी ग़ज़ल एलबम ‘तस्वीर जिन्दगी के’लोकार्पण पिछला दिने नई दिल्ली के हिन्दी भवन में देश के मशहूर साहित्यकार आ समालोचक डॉ. नामवर सिंह के हाथे भइल. टी सीरिज से रिलीज भइल एह पहिलका भोजपुरी...
Read Moreभोजपुरी गीत-गवनई के शौकीनन ला मुम्बई से एगो नीमन खबर आइल बा. भोजपुरी में पहिला बेर एगो गज़ल के सीडी टी-सीरीज ‘तस्वीर जिंदगी के’ नाम से जारी कइले बा. मनोज भावुक के लिखल गज़ल के आवाज दिहले बाड़न सरोज सुमन. सरोज सुमन के लोग एगो...
Read Moreमनोज भावुक के कहानीकार का रूप में बहुत कमे लोग जानेला. अधिका लोग उनका के कवि आ फिल्म समीक्षके का रूप में जानेला. पिछला दिने मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली तीन दिन के एगो साहित्यिक पर्व के आयोजन नई दिल्ली के मंडी हाउस का त्रिवेणी...
Read More– मनोज भावुक हई ना देखs ए सखी फागुन के उत्पात । दिनवो लागे आजकल पिया-मिलन के रात ॥1॥ अमरइया के गंध आ कोयलिया के तान । दइया रे दइया बुला लेइये लीही जान ॥2॥ ठूठों में फूटे कली, अइसन आइल जोश । अब एह आलम में भला, केकरा होई होश...
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