Author: Editor

गद्दारी का बहाने बतंगड़ चिन्तन (बतंगड़ – 6)

– ओ. पी. सिंह एह घरी गद्दारी चरचा में बा आ कुछ लोग एकरा के आपन मौलिक अधिकार बतावे लागल बा. अइसनका लोग पाकिस्तान का हित में बतियावल आपन शान समुझत बा. सरसरी निगाह से देखनी त बुझाइल कि एह पर कुछ लिखल भा बोलल बहुते आसान रही...

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टेंशन दीहल जाला, लीहल ना जाव ! (बतंगड़ – 5)

– ओ. पी. सिंह टेंशन दीहल जाला, लीहल ना जाव. जिनिगी का हर मैदान में ई रणनीति मजगर साबित होले बशर्ते रउरा मे बेंवत होखे सोझा वाला के टेंशन दे सके के. ब्लफ मारत खाली फँउके ला फँउके वाला के ई चाल उलुटो पड़ सकेला. जइसे कि अब...

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