Category: सरोकार

भउजी हो !

का बबुआ ? फगुआ आ गइल का ? लउकल त ना हऽ केनियो. बाकिर सुने में आवत बा कि आ गइल बा. ओकरे के खोजे निकलल बानी. चलीं, एही बहाने भउजी त याद आ गइली. ना त अब त जमाना बा अपने मरद मेहरारू में भूलाइल रहे के. बाप महतारी, भाई भउजाई, बहिन...

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वसंत कहीं नइखे भुलाइल

– पाण्डेय हरिराम जाड़ा आहिस्ता से मौसम के गाल चूमलसि त मौसम का रग में गर्मी दउड़ि गइल…. लोग कहल वसंत आ गइल. फगुआ आ गइल. आ आजु साँचहू के फगुआ ह. बाकिर कहवाँ… काल्हु सँझिया एगो पड़ोसिन बतवली कि सड़कन पर रौनक नइखे....

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होलिका दहन आ फगुआ का दिन खातिर कुछ अनुभूत सात्विक प्रयोग

– वैभव नाथ शर्मा फगुआ भा होली वसंत ऋतु में मनावल जाये एगो महत्वपूर्ण भारतीय त्योहार ह. हिंदू पंचांग का अनुसार होली फागुन महीना के पुरनमासी के मनावल जाला. रंग के त्योहार कहल जाये वाला ई पर्व पारंपरिक रूप से दू दिन के पर्व...

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जालसाजी कर के लिहले नोबेल पुरस्कार

– पाण्डेय हरिराम नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आ बंगलादेश में ग्रामीण बैंक के संस्थापक मोहम्मद यूनुस बहुते बड़हन पाखंडी, छली, आ खूनचूसवा सूदखोर त हइये हऽ भारत में आतंकी गतिविधि खातिर हूजी आ अलकायदा के फंडिंग करे के आरोपो बा...

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गाँव त सरकार खातिर कुछऊ नइखे

– पाण्डेय हरिराम सरकार का नजर में लागत बा कि देशवासियन के, खास कर के गाँव देहात में रहे वालन के, कवनो वजूदे नइखे आ ओह लोग के स्वास्थ्य खातिर सरकात इचिको चिन्तित नइखे लागत. कहे खातिर जवन कहे सरकार बाकिर अबकी के बजट देख इहे...

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