बड़का के ? मौत, की रुपइया ?
– आशुतोष कुमार सिंह आदमी के सुभाव बुझल बहुते कठिन बा. एकरा के जेतना गहराई से बुझे के प्रयास करीले, ओही अनुपात में अउरी अनबुझाह होत चलि जाले. बाकिर पिछला (30 सितम्बर 2010) के आंखि का सोझा एगो अइसन घटना घटल कि एह मानवीय...
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