दयाशंकर तिवारी के पाँच गो कविता
– दयाशंकर तिवारी (एक) नाहीं लउके डहरिया के छोर गोइयाँ नाहीं लउके डहरिया के छोर गोइयाँ पीरा...
Read More– दयाशंकर तिवारी (एक) नाहीं लउके डहरिया के छोर गोइयाँ नाहीं लउके डहरिया के छोर गोइयाँ पीरा...
Read More(दयानन्द पाण्डेय के बहुचर्चित उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) ‘भतार छोड़ि देब बाकिर नौकरी ना. ’...
Read More– चंद्रेश्वर 1) बैनीआहपीनाला प्यार के रंग कइसन होला ? का खूब गाढ़ लाल ओढ़हुल के फूल नियर ? का...
Read More– नीरज सिंह 1) माफीनामा बहुत दिन के बाद अइला प कतना बुझल बूझल लागत बा कहिए से बंद हमार गांव...
Read More– कादम्बिनी सिंह देखऽ तानी कि कबले बिहान होई ऊ अन्हरिया में कतना हरान होई। आँखि आपन उ, होई...
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