माँछी
दिनेश पाण्डेय उहाँ का सँगहीं रहनीं। बइठार रहे त चलीं सउदा-सुलुफ का सँगे कुछ मटरगस्तियो हो जाई, एक...
Read Moreडॉ. हरेश्वर राय सियासी छेनी से कालिमा तरासल बिया I चांदनी हमरा घर से निकासल बिया II भोर के आँख...
Read More– ऋचा चलऽ, फेरु सपनन के फेंड़ लगाईं जा ! मउरल-दनात अमराई से अलगा सड़की का गुलमुहरन का नीचे...
Read More– आनन्द संधिदूत जब आँगन का बीच में डँड़वार आ खेत का बीच में सड़क निकललि त खेत क बगड़ी आँगन का...
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