रोज-रोज काका टहल ओरियइहें !
(भोजपुरी गीत) – डा. अशोक द्विवेदी भीरि पड़ी केतनो, न कबों सिहरइहें.. रोज-रोज काका टहल...
Read More(भोजपुरी गीत) – डा. अशोक द्विवेदी भीरि पड़ी केतनो, न कबों सिहरइहें.. रोज-रोज काका टहल...
Read More(भोजपुरी ग़जल) – सुधीर श्रीवास्तव “नीरज” जहां मे लौटि आइल जा रहल बा बचल करजा...
Read More– डा० अमरेन्द्र मिश्र शेखर के गांजा के इ पहिलका दम रहे। अवरू सब साथी गांजा के दम पचावे आ जोम...
Read More(भोजपुरी ग़ज़ल) – शैलेंद्र असीम तहरी अँखिया में पानी बुझाते न बा पीर केतना सहीं हम, सहाते न बा...
Read Moreडॉ. रामरक्षा मिश्र विमल के डायरी चले दीं, प्रयोग बहे दीं धार काल्हु “ये दिल माँगे मोर” पर बहस होत रहे. हम कहलीं कि भाई ‘मोर’ का जगहा ‘और’ कहलो पर त कुछ बिगड़ी ना. फेर काहें एकर ओकालत करतारे लोग. हर भाषा में लिखे-पढ़ेवाला...
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