एक चिटुकी सेनुर
(भोजपुरी कहानी) – सुधीर श्रीवास्तव ‘नीरज’ राति अबहिन दुइयो घरी नाहीं बीतल होई बाकिर बरखा आ अन्हरिया क मारे अधराति के लखां सन्नाटा पसरि गइल रहे चारू ओर. अषाढ के बादर पूरा दल बल के साथे आ के डटि गईल रहे… आ...
Read More(भोजपुरी कहानी) – सुधीर श्रीवास्तव ‘नीरज’ राति अबहिन दुइयो घरी नाहीं बीतल होई बाकिर बरखा आ अन्हरिया क मारे अधराति के लखां सन्नाटा पसरि गइल रहे चारू ओर. अषाढ के बादर पूरा दल बल के साथे आ के डटि गईल रहे… आ...
Read More(ललित-व्यंग) – डा0 अशोक द्विवेदी आदमी आखिर आदमी हs — अपना मूल सोभाव आ प्रवृत्तियन से जुड़ल-बन्हाइल। मोह-ममता के लस्का आ कुछ कुछ आदत से लचार। ओकर परम ललसा ई हवे कि ऊ तरक्की करो आ सुख से रहो ! ई सुखवो गजब क चीझु ह s।...
Read Moreमान बढ़ाईं जा माटी के रामरक्षा मिश्र विमल दुअरा अंगना कहिया छिटकी मधुर किरिनिया भोर के कहिया पन्ना पलटल जाई भारत माँ के लोर के ? तमिल तेलगू बङला हिन्दी सब ह भारत के भाषा अपना जगह सभे कंचन बा एको ना बाटे ...
Read Moreडॉ. रामरक्षा मिश्र विमल के डायरी दीया-दियरी के दिन बहुरल तीन-चार दिन पहिले कपड़ा-ओपड़ा कीने खातिर निकलल रहीं जा. प्लेटफॉर्म प चढ़ते जवन लउकल, ओसे त चका गइलीं हम. जहाँ एक दिन पहिलहूँ खोजला पर पिछला जनम के दिया-दियरी मिलेले आ ऊहो...
Read Moreडॉ. रामरक्षा मिश्र विमल के डायरी जरूरी बा भोजपुरी के स्वाभिमान से जोड़ल ओइसे त बहुत पहिले से संविधान का आठवी अनुसूची में भोजपुरी के डलवावे के माङ भोजपुरिया करत बाड़न बाकिर एने दु-एक बरिस से त जइसे बाढ़ि आ गइल बा....
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