कवन गीत हम गाईं बसन्ती
(वसन्त पंचमी, 1ली फरवरी 2017, प मंगल कामना करत) – अशोक द्विवेदी कठुआइल उछाह लोगन के, मेहराइल...
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Read Moreमाया माहाठगिनि “माया माहाठगिनि” डॉ. गदाधर सिंह के भोजपुरी ललित निबंध संग्रह हटे, जवना के द्वितीय संस्करण के प्रकाशन सन् 2013 में निलय प्रकाशन, वीर कुँअर सिंह विश्वविद्यालय परिसर, आरा, भोजपुर (बिहार) से भइल बा. एकर...
Read MorePosted by Editor | Jan 11, 2017 | पुस्तक चर्चा, साहित्य |
मुट्ठी भर भोर ” मुट्ठी भर भोर ” डॉ. अरुणमोहन भारवि के भोजपुरी कहानी संकलन हटे, जवना के प्रकाशन सन् 2013 में अरुणोदय प्रकाशन, आर्य आवास, भारतीय स्टेट बैंक (मुख्य शाखा) के सामने, बक्सर- 802101 (बिहार) से भइल बा. एकर...
Read Moreडॉ. रामरक्षा मिश्र विमल के डायरी रसियाव खाईं आ टन-टन काम करत रहीं आजु स्टाफ रूम में अपना गीत के एगो लाइन गुनगुनात रहीं- “ननदी का बोलिया में बने रसियाव रे. सरगो से नीमन बाटे सइँया के गाँव रे.“ साहा सर के जिग्यासा पर चर्चा शुरू हो...
Read MorePosted by Editor | Jan 9, 2017 | पुस्तक चर्चा, साहित्य |
मातृभाषाई अस्मिता बोध “मातृभाषाई अस्मिता बोध” डॉ. जयकांत सिंह के भोजपुरी मातृभाषा चिंतन पर एगो प्रबंधात्मक पुस्तक बिया, जवना के प्रकाशन सन् 2016 में राजर्षि प्रकाशन, मुजफ्फरपुर – 842001 (बिहार) से भइल बा. एकर...
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