Category: साहित्य

हे ! नाग देवता पालागी !

– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी आस्तीन में पलिहा  बढ़िहs मनही मन परिभाषा गढ़िहs कुछो जमइहा कबों उखरिहा गारी  सीकमभर  उचारिहs हे ! नाग देवता पालागी !   हरदम  तोसे नेह  देवता बसिहा  एही  गेह  देवता नीको नेवर बुझिया भलहीं डसिहा...

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माई अब जोखाए लगली

– रश्मि प्रियदर्शिनी अँगना-दुअरा एक कs देवेले लोग कहेला माई के गोड़िया में चकरघिन्नी बा दुअरा के बंगली से अँगना के रसोई तक चलत रहेले चलत रहेले   परिकरम करे जवन धरती आकास एक दिन उहे गोड़वा टेटाए लागल माई के उमरिया बुझाए...

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बहल गाँव बिलाइल खेती

– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी   नइकी शादी छंटल  बहुरिया डिस्को झारत भर दुपहरिया भइया फ्रिज में पानी राखस लुग्गा धोवे  रोज तिसरिया अब मइया न बलाएँ लेती . बहल गाँव बिलाइल खेती .   बइठल दुअरे बब्बा रोवें घरवां दादी बरतन...

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तीज : अखंड सोहाग के ब्रत

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल   शास्त्रन में तीज के हरितालिका नाम से जानल जाला. “हरितालिका” शब्दो एह ब्रत खातिर खूब प्रचलित बा. भादो का अँजोर में तृतीया तिथि1 के एकर अनुष्ठान कइल जाला. पति खातिर ‘तीज’ आ बेटा खातिर...

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जिम्मेदारी

– रामरक्षा मिश्र विमल जिम्मेदारी सघन बन में हेभी गाड़ी के रास्ता खुरपी आ लाठी के बल नया संसार स्वतंत्र प्रभार   जिम्मेदारी जाबल मुँह भींजल आँखि फर्ज के उपदेश आ निर्देश गोपाल के ठन ठन नपुंसक चिंतन   जिम्मेदारी...

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