Category: साहित्य

बहल गाँव बिलाइल खेती

– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी   नइकी शादी छंटल  बहुरिया डिस्को झारत भर दुपहरिया भइया फ्रिज में पानी राखस लुग्गा धोवे  रोज तिसरिया अब मइया न बलाएँ लेती . बहल गाँव बिलाइल खेती .   बइठल दुअरे बब्बा रोवें घरवां दादी बरतन...

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तीज : अखंड सोहाग के ब्रत

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल   शास्त्रन में तीज के हरितालिका नाम से जानल जाला. “हरितालिका” शब्दो एह ब्रत खातिर खूब प्रचलित बा. भादो का अँजोर में तृतीया तिथि1 के एकर अनुष्ठान कइल जाला. पति खातिर ‘तीज’ आ बेटा खातिर...

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जिम्मेदारी

– रामरक्षा मिश्र विमल जिम्मेदारी सघन बन में हेभी गाड़ी के रास्ता खुरपी आ लाठी के बल नया संसार स्वतंत्र प्रभार   जिम्मेदारी जाबल मुँह भींजल आँखि फर्ज के उपदेश आ निर्देश गोपाल के ठन ठन नपुंसक चिंतन   जिम्मेदारी...

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बाजेला बधाईया अँगनवा-दुअरिया

– केशव मोहन पाण्डेय जनम लिहले कन्हैया कि बाजेला बधाईया अँगनवा-दुअरिया नू हो। अरे माई, दुआरा पर नाचेला पँवरिया कि अइले दुखहरिया नू हो।। बिहसे ला सकल जहान कि अइले भगवान कि होई अब बिहान नू हो। अरे माई, हियरा में असरा बा जागल...

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जबले हरियरी रही, कजरी गवात रही

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल चाहे शहर होखे भा गाँव आ गाँव में त अउरी, सावन के महीना आवते शुरू हो जाला लइकन के कबड्डी, खो-खो, चीका आ फनात के मजदार खेल. शहर-ओहर में त लइकियो ईहे गेमवा खेलेली सन बाकिर गाँव अबहिंयो एगो परंपरा का...

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