रमबोला आज जवान भइल
भोजपुरी साहित्य से हमार पहिलका परिचय जवना रचना से भइल तवन रहल हरीन्द्र हिमकर जी के लिखल खण्डकाव्य...
Read MorePosted by Editor | Jul 11, 2016 | कविता, पुस्तक चर्चा, समीक्षा, साहित्य |
भोजपुरी साहित्य से हमार पहिलका परिचय जवना रचना से भइल तवन रहल हरीन्द्र हिमकर जी के लिखल खण्डकाव्य...
Read More– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी टीभी के परिचरिचा देखs अस लागे, गोंइठा घी सोखे। आन्हर कुकुर बतासे भूंके।। मिलत जुलत सभही गरियावत पगुरी करत सभे भरमावत पुतरी नचावत मुँह बिरावत एहनिन के अब मुँह के रोके। आन्हर कुकुर बतासे भूंके।। छऊँक...
Read More– डा. कुमार नवनीत काठ करेजी भईल समईया पल पल बदलत दाव, बिछिलायीं जनि, धरीं थहा के आपन एकहक पाँव। सभ धवते बा, आप न धाईं सगरी सपना बेंचि न आईं मोल न कवनो मोल बिकाला, जहवाँ रहीं इहे सरियाईं आईं आपन छान्हि छवाईं तेजि महलिया...
Read Moreपिछला 15 मई का दिने पूर्वांचल भोजपुरी महासभा का तरफ से हिन्दी भवन, ग़ाज़ियाबाद में एगो भव्य राष्ट्रीय कवि सम्मेलन आयोजित कइल गइल जवना क सफलता देखा दिहलसि कि भोजपुरी के चाहे वाला पूर्वांचले ना देश के हर कोना में भरल बाड़ें. सुनवइयन...
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