जिम्मेदारी
– रामरक्षा मिश्र विमल जिम्मेदारी सघन बन में हेभी गाड़ी के रास्ता खुरपी आ लाठी के बल नया संसार स्वतंत्र प्रभार जिम्मेदारी जाबल मुँह भींजल आँखि फर्ज के उपदेश आ निर्देश गोपाल के ठन ठन नपुंसक चिंतन जिम्मेदारी...
Read More– रामरक्षा मिश्र विमल जिम्मेदारी सघन बन में हेभी गाड़ी के रास्ता खुरपी आ लाठी के बल नया संसार स्वतंत्र प्रभार जिम्मेदारी जाबल मुँह भींजल आँखि फर्ज के उपदेश आ निर्देश गोपाल के ठन ठन नपुंसक चिंतन जिम्मेदारी...
Read More– केशव मोहन पाण्डेय जनम लिहले कन्हैया कि बाजेला बधाईया अँगनवा-दुअरिया नू हो। अरे माई, दुआरा पर नाचेला पँवरिया कि अइले दुखहरिया नू हो।। बिहसे ला सकल जहान कि अइले भगवान कि होई अब बिहान नू हो। अरे माई, हियरा में असरा बा जागल...
Read More– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल चाहे शहर होखे भा गाँव आ गाँव में त अउरी, सावन के महीना आवते शुरू हो जाला लइकन के कबड्डी, खो-खो, चीका आ फनात के मजदार खेल. शहर-ओहर में त लइकियो ईहे गेमवा खेलेली सन बाकिर गाँव अबहिंयो एगो परंपरा का...
Read MorePosted by Editor | Jul 11, 2016 | कविता, पुस्तक चर्चा, समीक्षा, साहित्य |
भोजपुरी साहित्य से हमार पहिलका परिचय जवना रचना से भइल तवन रहल हरीन्द्र हिमकर जी के लिखल खण्डकाव्य...
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