Category: साहित्य

देशनिकाला

– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ रबीस जापान में कम्प्यूटर इंजीनियरिंग के पद पर काम करत रहस. उनका उहँवा एगो जापानी लइकी से नेह-सनेह बढ़ल आ एक दिन दूनो जने बिआह के बन्हन में बन्हा गइल लोग. लइकियो एगो बड़ दूध डेयरी कम्पनी...

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मातृभाषा के महत्व

– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ कवनो व्यक्ति,समाज,देश भा राष्ट्र के बनावे-जनावे के जबरदस्त जरिआ होले ओकर आपन भाषा. ओकर आपन मातृभाषा आ राज/राष्ट्रभाषा. दुनिया के आन देश ओकरा संस्कृति, शिक्षा, दर्शन, ज्ञान-विज्ञान वगैरह...

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जयकान्त सिंह के तीन गो कविता – नया आ पुरान

– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ जेठ भाई के निहोरा करऽ जन अनेत नेत, बबुआ सुधारऽ सुनऽ, तूँही ना ई कहऽ काहे होला रोजे रगड़ा । आपन कमालऽ खालऽ, एनहूँ बा उहे हालऽ आर ना डरेड़ फेर, काहे ला ई झगड़ा ।। चूल्हे नू बँटाला कहीं,...

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ईशु स्मृति शोक गीत

चलि गइल छोड़ि कवन देसवा हो बाबू, मिले नाहिं कवनो सनेसवा हो बाबू।। गोदिये से गइल, अवाक् रह गइनीं कवनो ना बस चलल, का का ना कइनी कुहुके करेजवा कलेसवा हो बाबू।। बबुआ तुँ रहल, एह अँखिया के जोति तोहरे ला झरेला, नयनवा से मोती हूक उठे...

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भीमा शंकर ज्योतिर्लिंग के दर्शन : एगो ना भुलाए जोग यात्रा

– डाॅ. अशोक द्विवेदी काल्हु भोरे क निकलल रात एक बजे घरे पहुंचनी. ए साल के सावन में बलिया बनारस ढेर इयाद आइल बाकि महाराष्ट् में भीमा श॔कर ज्योतिर्लिंग के दरस परस खातिर कइल यात्रा अपना आप में अनूठा आ अविस्मरणीय रहल. पहाड़,...

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