दू गो गजल
– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल 1. मन इ जब जब उदास होखेला तोहरे आस-पास होखेला घर धुँआइल बा आँख लहरेला जब भी बुधुआ किताब खोलेला तोहरा के भुला सकबि कइसे आजुओ मन लुका के रो लेला चोर भइलीं भलाई ला...
Read More– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ कवनो व्यक्ति,समाज,देश भा राष्ट्र के बनावे-जनावे के जबरदस्त जरिआ होले ओकर आपन भाषा. ओकर आपन मातृभाषा आ राज/राष्ट्रभाषा. दुनिया के आन देश ओकरा संस्कृति, शिक्षा, दर्शन, ज्ञान-विज्ञान वगैरह...
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