Category: साहित्य

गौरैया

– केशव मोहन पाण्डेय जइसे दूध-दही ढोवे सबके सेहत के चिंता करे वाला गाँव के ग्वालिन हऽ गौरैया एक-एक फूल के चिन्हें वाला मालिन हऽ। अँचरा के खोंइछा ह विदाई के बयना हऽ अधर के मुस्कान ह लोर भरल नैना हऽ। चूडि़हारिन जस सबके घर के...

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बनचरी (चउथी कड़ी)

– डा॰ अशोक द्विवेदी एगो विशाल बटवृक्ष का नीचे पत्थर शिला खण्ड का टुकड़न से सजाइ के एगो चबूतरा बनावल रहे. वृक्ष का एकोर ओइसने पत्थर के चापट टुकड़न के सरियाइ के गोलाकार ऊँच देवाल लेखा बनावल रहे जवना का ऊपर से वटवृक्ष क डाढ़ि...

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बनचरी (तिसरकी कड़ी)

– डा॰ अशोक द्विवेदी सोझा बन के कुछुए भीतर एगो बड़का झँगाठ फेंड़ का ऊपर से दू गो आँख ओनिये टकटकी बन्हले भीम आ उनका पलिवार का एक-एक हरकत के देखत रहे. भीम के, साँझि से एह सुतला राति ले तनिको सुनगुन ना मिलल रहे कि ओह लोगन पर नजर...

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पाती के चौहत्तरवाँ अंक का बहाने कुछ मन क बात

– अशोक द्विवेदी पत्रिका के 74वाँ अंक रउवा सभ के सामने परोसत हम अपना स्रम के बड़भागी मान रहल बानी जे 1979 से जूझत-जागत, ठोंकत-ठेठावत हमनी का पैंतीसवाँ बरिस में चलि अइली जा। एह यात्रा में, सँग-सँग कुछ डेग चले वाला हर...

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नयका साल

– डॉ. कमल किशोर सिंह एक साल अउर सरक गइल, कुछ छाप आपन छोडि के. भण्डार भरि के कुछ लोगन के, बहुतो के कमर के तोड़ी के. प्रकोप परलय के दिखा दुनिया के कुछ झकझोरी के. आईं बिदाई करीं एकर, दसो नोहवा जोड़ी के, आ स्वागत करीं नव वर्ष...

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