श्रेणी: कविता

फागुन के तीन गो गीत

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल एक लागेला रस में बोथाइल परनवा ढरकावे घइली पिरितिया के फाग रे ! धरती लुटावेली अँजुरी से सोनवा बरिसावे अमिरित गगनवा से चनवा इठलाले पाके जवानी अँजोरिया गावेला पात पात प्रीत के बिहाग रे. पियरी पहिरि...

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मस्त फगुनवा

– ओ.पी. अमृतांशु रंग – अबिरवा लेके गुललवा मस्त फगुनवा आईल बा. केने बाड़ी पुरूवा रानी पछेया बउराईल बा. सरसों फुलाइल, लहराइल बा तीसी, मटर के ढेंढी देखावे बतीसी, झपड़-झपड़ गेहूमा के बालवा कचरी पे लोभाइल बा. मोजरा से रस...

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मुंबई में आयोजित भइल भोजपुरी के एगो खास काव्य संध्या

पिछला दिने पहली फरवरी के मुंबई में भोजपुरी के एगो खास काव्य संध्या के आयोजन भइल. खास एह माने में कि मराठी भाषी प्रबुद्ध लोग के मानस के मर्म छू लिहलसि भोजपुरी कविता. आयोजन करवले रहल सामाजिक सांस्कृतिक संस्था “सेतु” आ...

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बाबा बोलऽ ना

– डॉ.कमल किशोर सिंह देखलऽ कइसन सपनवा, बाबा बोलऽ ना पूछेला जहनवा सब बच्चा बुढ जवनवा बाबा बोलऽ ना……. देखलऽ कइसन सपनवा, बाबा बोलऽ ना. मौन काहे बाड़ऽ, काहे कइलऽ अनसनवा, बोलऽ कइसे होई तहार मनसा पुरनवा बाबा बोल ना...

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माई के इयाद

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 11वी प्रस्तुति) – मनोकामना सिंह शाम के, घर लवट के अइला पर देख के चेहरा उदास पूछली माधो के मेहरारू रउरा मुँह काहे लटकवले बानीं? बंगला के पाँच अस बनवले बानीं ? कहलें माधो, ”का...

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