देशनिकाला
– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ रबीस जापान में कम्प्यूटर इंजीनियरिंग के पद पर काम करत रहस. उनका उहँवा एगो जापानी लइकी से नेह-सनेह बढ़ल आ एक दिन दूनो जने बिआह के बन्हन में बन्हा गइल लोग. लइकियो एगो बड़ दूध डेयरी कम्पनी...
Read More– कमलाकर त्रिपाठी बाँके बिहारी घर से दुई-तीन कोस चलल होइहँ कि ओनकर माई चिल्लइलिन, ”रोका हो गड़िवान, दुलहिन क साँस उल्टा होय गइल.“ बाँके लपक के लढ़िया के धूरा पर गोड़ राखि के ओहार हटाय के तकलन – ”का भइल रे?“ ”होई का ए...
Read More– रामदेव शुक्ल मीतू हम दूनू जने उहाँ पहुंचि गइल बानी जाँ, जहाँ से लवटले के कवनो राहि नइखे बँचल। अगहीं बढ़े के बा, चाहे एहर बढ़ि चलल जा, चाहे ओहर। बोलऽ कवने ओर चलल जाव? मीता के लिलार चमकि उठल। कहली- ”तहार कहल आ हमार सूनल, ई...
Read More– औम प्रकाश सिंह वइसे त रउरा बहुते कहानी पढ़ले होखब जवन साँच पर आधारित होले. एहिजा जवन हम कहे जात बानी तवन पूरा तरह से कपोल कल्पना ह बाकिर देखीं साँच से कतना मिलत जुलत बा ई कहानी. एगो देश रहे जहाँ कई बरीस का बाद भठियारा...
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