Category: कहानी

बाजलि बैरनि रे बाँसुरिया

– गिरिजाशंकर राय ‘गिरिजेश’ पाकिस्तान के मारि के हमार सिपाही ओकर छक्का छोड़ा दिहलन सऽ. चीन क कुल्हि चल्हाँकी भुला गइल. मिठाई खाइब… हो… हो. ईहे हई नगरी, जहाँ बाड़ी बनरी, लइकन क धइ-धइ खींचेली टँगरी. एगो बीड़ी बाबू...

Read More

भैरवी क साज

– ईश्वरचन्द्र सिन्हा सिंहवाहिनी देवी के सालाना सिंगार के समय माई के दरबार में जब चम्पा बाई अलाप लेके भैरवी सुरू कइलिन, त उहाँ बइठल लोगन क हाथ अनजाने में करेजा पै पहुँच गयल. रात भर गाना सुनत-सुनत जे झपकी लेवे सुरू कय देहले...

Read More

भगवान के चटकन

– डॉ॰ उमेशजी ओझा अरे ए रबिन्दरा, आपन दिमाग ठीक राख, जमीन प रहेके सीख, हवा में मत उड़. सब कोर्इ के इजत होला. जोऽ, आ लईकी देख आउ आ बढिया से आपन बेटा सुरेश के बिआह क दे. ढेरी लईकी देखि के छोड़ छाड़ मत कर, भगवान सब देखत बानी....

Read More

भाग गइल भूत

– डॉ॰ उमेशजी ओझा छुटी के दिन रहे. हम सुरेश का घरे छुट्टी मनावे गइनी त हमरा के देखते सुरेश कहलन, ‘अहो भाग्य कि रउआ पधरनी हमरा दुआर प.’ ‘अरे का बोलऽतानी. बहुत पहिले से सोचले रही कि अतवार का दिने रउआ घरे के...

Read More

गुलजारी लाल के जूता

– देवेन्द्र कुमार गुलजारी लाल जी आपन संघतिया मनमौजी के संगे साप्ताहिक बाजार मंगला हाट में हफ्ता भर के जरूरी सामान के खरीदारी करे खातिर गइल रहलें. दूनो संघतिया बाजार में घूमत-फिरत आपन जरूरत के मुताबिक सर-सामान खरीदत रहलें....

Read More

Recent Posts