भाग गइल भूत
– डॉ॰ उमेशजी ओझा छुटी के दिन रहे. हम सुरेश का घरे छुट्टी मनावे गइनी त हमरा के देखते सुरेश कहलन, ‘अहो भाग्य कि रउआ पधरनी हमरा दुआर प.’ ‘अरे का बोलऽतानी. बहुत पहिले से सोचले रही कि अतवार का दिने रउआ घरे के...
Read More– डॉ॰ उमेशजी ओझा छुटी के दिन रहे. हम सुरेश का घरे छुट्टी मनावे गइनी त हमरा के देखते सुरेश कहलन, ‘अहो भाग्य कि रउआ पधरनी हमरा दुआर प.’ ‘अरे का बोलऽतानी. बहुत पहिले से सोचले रही कि अतवार का दिने रउआ घरे के...
Read More– देवेन्द्र कुमार गुलजारी लाल जी आपन संघतिया मनमौजी के संगे साप्ताहिक बाजार मंगला हाट में हफ्ता भर के जरूरी सामान के खरीदारी करे खातिर गइल रहलें. दूनो संघतिया बाजार में घूमत-फिरत आपन जरूरत के मुताबिक सर-सामान खरीदत रहलें....
Read More– देवेन्द्र कुमार सउंसे घर में कोहराम मच गइल. सुमना के बाबा के मिजाज राति खानि एकाएक खराब हो गइल. सभे लोगन के चेहरा प हवाई उड़त रहे. अब का होई? अतना राति के ऊहां के अस्पताल ले जाए के परी. काहेंकि एह घड़ी तो कवनो डाक्टर...
Read More– विनोद द्विवेदी सड़क का किनारे बान्हल बकरन के झुण्ड में कुछ बकरा बीमार आ उदास लागत रहलन स. एगो बकरा दूइए दिन पहिले खरीद के आइल रहे. उपास खड़ा दोसरा बकरा का तरफ देख के जइसे कहल चाहत रहे कि ना जाने कवना घड़ी में हमार जनम...
Read More
Recent Comments