Category: सतमेझरा

छब्बीस रुपिया में अमीर हो गइले लस्टमानंद

– जयंती पांडेय जबसे योजना आयोग के मोंटेक भाई ई कहले कि हमरा गांव के लोग 26 रुपिया में अमीर हो जाई तबसे बाबा लस्टमानंद सीना फुला के घूमत रहले लेकिन ई पूजा में जब बजार करे गइले तऽ बुझाइल कि ई तऽ कुछऊ ना हऽ. काहे कि बजार में...

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कहो फलाने अब का होई

– अशोक मिश्र सबेरे मार्निंग वॉक करे निकलनी त सोचली कि उस्ताद मुजरिम से मिल लिहल जाव. से वॉक से लवटति घरी उनुका ‘गरीबखाना’ पर पहुंच गइनी. हमरा के देखते मुजरिम खुश हो गइलन आ कहले, ‘आवऽ..आवऽ..बड़ा मौका पर आइल बाड़ऽ. तोहरा के...

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नेता बने के सोचले छोड़ दिहले रामचेला

– जयंती पांडेय जबसे तरह तरह के घोटाला के केस में नेता लोग दनादन जेल जाये लागल तबसे रामचेला बड़ा मायूस हो गइले. मुँह सड़ल आम अस बना लिहले आ चेहरा ओल अस लटका लिहले. बाबा लस्टमानंद के बड़ा माया लागल. लगे जा के पूछले, का हो...

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अर्थ बा त समर्थ बा ना त बेअर्थ बा

– जयंती पांडेय हम भ्रष्टाचार के भविष्य के ले के निश्चिंत बानी. ई एकदम सत्य ह कि खाली हमनिये के देस में भ्रष्टाचार अउर भ्रष्टाचारियन खातिर तमाम संभावना आ सुविधा बा. हमनिये के ई हुनर हऽ कि हमनी का कतहियों, कबहुँओं करप्शन के...

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स्वर्ग में बहाली

– अशोक मिश्र हमरा जगहा रउरा होखतीं, त चिहुँक गइल रहतीं. काहे कि हमरा सोझा एगो बहुते सुघड़ ‘सुंदरी’ खड़ा मुस्कुरात रहल. पहिले त हम समुझनी कि कवनो भूतनी हमरा पर सवार होखे आइल बिया. ई सोचते हमरा पूरा देह में डर समा गइल. लड़िकाईं...

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