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भोजपुरी भाषा साहित्य के एगो नया पहिचान दिहलसि "पाती"

“भोजपुरी दिशाबोध के वैचारिक साहित्यिक पत्रिका “पाती” एगो अइसन रचनात्मक मंच ह जवन भोजपुरी भाषा साहित्य के एगो नया पहिचान दिहलसि. एकरा रचनात्मक आंदोलन से जुड़ के अनेके लेखक राष्ट्रीय स्तर पर आपन पहचान...

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साल 2012 के बिदाई आ गलचउर

(पाती के नयका अंक, दिसंबर २०१२, के संपादकीय) (भोजपुरी दिशा बोध के पत्रिका “पाती” के भोजपुरी प्रकाशनन में एगो खास जगहा बा. अँजोरिया के एह बात के खुशी बा कि पाती संगे एकर अपनापन पिछला कई बरीसन से चलल आवत बा. पाती के...

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भोजपुरी के विकासमान वर्तमान

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल अपना प्रिय अंदाज, मिसिरी के मिठास आ पुरुषार्थ के दमगर आवाज का कारन भोजपुरी शुरुए से आकर्षण के केंद्र में रहल बिया. भाषा निर्भर करेले विशेष रूप से भौगोलिक कारन आ बोलेवाला लोगन के आदत, रुचि आ...

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गीत

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 23वी प्रस्तुति) – रिपुसूदन श्रीवास्तव जिन्दगी हऽ कि रूई के बादर हवे, एगो ओढ़े बिछावे के चादर हवे. जवना घर में ना पहुँचे किरिन भोर के जवना आँखिन से टूटे ना लर लोर के केकरा असरे...

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‘गंगा-तरंगिनी’ (पुस्तक समीक्षा)

जिये-जियावे क सहूर सिखावत अमानुस के मानुस-मूल्य देबे वाली ‘गंगा-तरंगिनी’ ‘गंगा-तरंगिनी’ (काव्य-कथा) अभिधा प्रकाशन, मुजफ्फरपुर. मूल्य – पचास रुपये. प्रथम संस्करण. कवि – रविकेश मिश्र (पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक)...

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