Tag: बतकुच्चन

मिले मियाँ के माँड़ ना, बिरयानी के फरमाइश! (बतकुच्चन 163)

मिले मियाँ के माँड़ ना, बिरयानी के फरमाइश! आजु रेल बजट सुनत घरी कुछ कुछ अइसने लागल. अब सही भा गलत एकर फैसला त रउरे सभे कर पाएब बाकिर हमरा लागल कि कहीं ना कहीं अच्छा दिन देखत लोग के सपना टूटल बा. अब एकरा के सरकार के हियावे कहल...

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बापे पूत परापत घोड़ा, बहुत नहीं त थोड़ा थोड़ा (बतकुच्चन 162)

बापे पूत परापत घोड़ा, बहुत नहीं त थोड़ा-थोड़ा. इहाँ ले कि जेकरा बारे मे कहल गइल कि ‘डूबल बंश कबीर के जमले पूत कमाल’ उ कमालो एह कहाउत प ठीक बइठेले. हालांकि कबीर के हर बात के उलटबाँसि बतियावत कमाल के कहना रहे कि...

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जेकर बनरी उहे नचावे (बतकुच्चन 161)

जेकर बनरी उहे नचावे, आन खेलावे काटे धावे. कहला के मतलब कि जवन जेकर काम ह, जवना काम में जे पारंगत बा, उ काम ओही आदमी के करे के चाहीं. दोसर केहु करे चली त नुकसान होखे के अनेसा रहेला. एही बात के एगो मतलब अउर निकलेला. पोसुआ अपना...

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बकसऽ ए बिलार मुरगा बाँड़ हो के रहीहें. (बतकुच्चन 160)

बकसऽ ए बिलार मुरगा बाँड़ हो के रहीहें. रउरा सभे सोचत होखब कि ई हर हफ्ते का आ जालें बक बक करे. आ हम सोचीले कि ल फेर कपारे आ गइल बतकुच्चन करे के दिन. गनीमत एतने बा कि बहुत कमे जगहा घेरे के पड़ेला. जइसे नाच का बीच बीच में आवे वाला...

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वेल बिगन इज हाफ डन (बतकुच्चन 159)

वेल बिगन इज हाफ डन. अंगरेजी के एह कहाउते जइसन भोजपुरी के कहाउत ह साधे समहुत सधे पुनाहुत. मतलब कि अगर कवनो काम के समहुत, शुरुआत, बढ़िया हो गइल त मान लीं कि ओकर पुर्णाहुति, पुनाहुतो, बढ़िए रही. बाकिर मन साधे आ सधे में अझुरा के रहि...

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