Tag: बतकुच्चन

शपथ, कसम, किरिया, आ सौगन्ध (बतकुच्चन 158)

ओह दिन जब राष्ट्रपति महोदय देश के नयका प्रधानमंत्री के शपथ दिआवत रहलन त पूरा देश देखत रहे. केहु खुशी से त केहु निराशा से. कुछ लोग के त आतना कष्ट रहल कि उ लोग समारोह का ओर झाँकहु ना गइल. खैर. जे गइल ओकर मर्जी, जे ना गइल ओकर...

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लोके आ लपके के फरक (बतकुच्चन 157)

कहल गइल बा कि बीत गइल तवन बात गइल. बाकिर का ई सचहू एतना आसान होला? बीते ला त चुनाव बीतिए नू गइल बाकिर ओकर फल अब खट्टा निकले भा मीठ पता ना कतना साल ले खाए के पड़ी. जीते वाला त जीत गइल बाकिर कुछ लोग जीतिओ के ना जीतल. सपना सपने रहि...

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जब पता ना चले कि बाझल बानी कि बझावल बानी (बतकुच्चन १५६)

समुझ में नइखे आवत कि बाझल बानी कि बझावल गइल बानी. बाकिर अतना त जरूर कह सकीलें कि अझुराइल नइखीं. बाझ भा बाझि के मतलब होला पेंच भा गाँठ भा काम के बोझा. आ जब आदमी ओह पेंच के खोले, सलटावे में लाग जाला त कहल जाला कि बाझल बा. हालांकि...

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लग्गी से पानी पिआवल (बतकुच्चन १५५)

मौका आ माहौल चुनाव के बा से सभे लग्गी से पानी पिआए में लागल बा. लग्गी से पानी पिआवल एगो मुहावरा ह जवना के मतलब होला झुठहीं के कवनो काम कइल. जवना काम के कवनो फल नइखे मिले वाला. हालांकि सोचेवाली बात बा कि लग्गी का सहारे फल त...

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पोरे पोरे उठऽता लहरिया ए ननदी (बतकुच्चन – 154)

अंगुरी में डँसले बिया नगिनिया ए ननदी, सईंया के जगा दे! पोरे पोरे उठऽता लहरिया ए ननदी भईया के जगा दे. कबो महेन्दर मिसिर ई पूरबी लिख के मशहूर हो गइल रहलें. आ आजु ले एकर लहर थमल नइखे. अबहियों ई लहर ओहि तरह लहरावत रहेले जब ना तब....

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