Tag: बतकुच्चन

बतकुच्चन – ६४

सुने में आवऽता कि मानसून के बरखा केरल का किनार पर चहुँप गइल बा. अबकी क मानसून करीब सात दिन देरी से आइल बा. आ एह बीच आसमान से बरसत आग के धाह तनी मनी कम भइल बा. बादर बरसे भा ना छाइओ के छाँह कर देला. मानसून के देर से अइला पर मन इहे...

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बतकुच्चन – ६३

आजु जब बतकुच्चन लिखे बइठल बानी त घर दुअरा, खेते खरिहान, सड़क बधार सगरी ओर आसमान से आग बरसत बा. आ एह आग से राजनीतिओ बाच नइखे पावल. पेट्रोल क दाम में बढ़ोतरी का खिलाफ जनता अगियाइल बिआ आ राजनीतिक दल विरोध करे में लागल बाड़े. जे विरोध...

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बतकुच्चन – ६२

हमरा हियाँ अइब त का का ले अइब? तोहरा किहाँ जाएब त का का खिअइब? एह भोजपुरी कहावत में समाज के सुभाव झलकत बा जहाँ आदमी सिर्फ अपना मतलब से मतलब राखे लागल बा. हर हाल में फायदा ओकरे होखे के चाहीं आ अइसे कि सामने वाला के पतो ना लागे भा...

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बतकुच्चन – ६१

पिछला हफ्ता बड़की पंचायत के साठ साल पूरा भइला पर इहे लागल कि साठा त अब भइल बाकिर सठियाइल जमाना से बा. अब त अधिकृत तौर पर सठिया गइल कहल जा सकेला ना त साठ साल पुरान बात पर लट्ठ ले के ना निकलल रहीत लोग. बुड़बक मरले बिराने फिकिरे....

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बतकुच्चन – ६०

रोए के रहनी तले अँखिए खोदा गइल. एह भोजपुरी कहाउत के सीधा मतलब त इहे निकलेला कि कुछ खराब सोचते रहीं कि ऊ होइओ गइल. पता ना अनिष्ट अनेसा में अइसन कवन खासियत होला कि सोचलीं त हो के रही. अगर कुछ गलत होखे के अनेसा मन में बनल बा त जान...

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