रैली के सवर चलल बा
– जयंती पांडेय रोज रैली, प्रदर्शन, नारेबाजी से एकदम रीगल रामचेला कहले – बाबा आजुकाल ई नेतवन के का हो गईल बा कि रोज प्रदर्शन रोज बवाल. जेकरा देखऽ उहे झंडा टंगले चिचियात घूमऽता. बाबा लस्टमानंद मुस्किया के कहले,...
Read More– जयंती पांडेय रोज रैली, प्रदर्शन, नारेबाजी से एकदम रीगल रामचेला कहले – बाबा आजुकाल ई नेतवन के का हो गईल बा कि रोज प्रदर्शन रोज बवाल. जेकरा देखऽ उहे झंडा टंगले चिचियात घूमऽता. बाबा लस्टमानंद मुस्किया के कहले,...
Read More– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया” आजकल लोग पर एगो नया भूत सवार हो गइल बा. जे जहें बा उ उहें बिना सही-गलत के बिचार कइले गोलियावल सुरु क देता, अउर एतने ना, लोग गोलियाइलो सुरु हो जाता. कबो-कबो त लोग बिना बात के बात में बात...
Read Moreक्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्र वाराणसी आ भोजपुरी अध्ययन केन्द्र बीएचयू के साझा आयोजन “भोजपुरी लोक उत्सव २०१२” में ३० अक्टूबर के दुनिया में बोलियन आ लोकभाषन के होत अनादर आ हत्या पर चिंता जतावल गइल. नाट्य शास्त्र...
Read More– डा॰अशोक द्विवेदी कविता का बारे में साहित्य शास्त्र के आचार्य लोगन के कहनाम बा कि कविता शब्द-अर्थ के आपुसी तनाव, संगति आ सुघराई से भरल अभिव्यक्ति ह. कवि अपना संवेदना आ अनुभव के अपना कल्पना शक्ति से भाषा का जरिए कविता के...
Read MorePosted by Editor | Oct 30, 2012 | पुस्तक चर्चा, भाषा, सरोकार |
आ बिना हेजिटेशन आई कैन सिंसियरली से कि इस टाइप के प्रयास वेयर नीडेड फ्राम लांग लांग टाइम. अनफार्चुनेटली दि भोजपुरिया पीपुल अंडरस्टैंडे नहीं करते कि डेवलपमेंट आफ भोजपुरी उनके बियांड अप्रोच है. भोजपुरी का डेवलपमेंट चाहिएं त उसपर...
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