लोक कवि अब गाते नहीं – ११
(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) दसवीं कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं सम्मान मिलला बाद अपना गाँवे चहुँपल लोक कवि के एगो पंडित के कहल नचनिया पदनिया के बात कतना खराब लागल रहे. बाकिर चेयरमैन साहब का...
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