Tag: कविता

हेराइल आपन गाँव

– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी कोइला से पटरी पचरल ले के शीशी घोटल सांझी खानि घरे मे माई ले रगड़ के मुंहो पोछल बा के इहवाँ जे दुलराइल नइखे । माई के झिड़की खातिर माटी मे सउनाइल खाड़ हँसे बाबूजी बबुआ बा भकुयाइल अब्बो ले भुलाइल नइखे ।...

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फगुनवा मे

– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी बियहल तिरिया के मातल नयनवा, फगुनवा में ॥ पियवा करवलस ना गवनवां, फगुनवा में ॥ सगरी सहेलिया कुल्हि भुलनी नइहरा । हमही बिहउती सम्हारत बानी अँचरा । नीक लागे न भवनवा, फगुनवा में ॥ पियवा ….....

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फागुन बाट ना जोहे

– अशोक द्विवेदी फागुन बाट ना जोहे, बेरा प’ खुद हाजिर हो जाला. रउवा रुचेभा ना रुचे, ऊ गुदरवला से बाज ना आवे. एही से फगुवा अनंग आ रंग के त्यौहार कहाला. राग-रंग के ई उत्सव, बसन्त से सम्मत (संवत् भा होलिका दहन) आ होली से...

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होरी आइल बा आ खुलल मुँह बा : 2 गो कविता

– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी होरी आइल बा जरत देश बा-धू धू कईके सद्बुद्धि बिलाइल बा. कइसे कहीं कि होरी आइल बा. चंद फितरती लोग बिगाड़ें मनई इनकर नियत न ताड़ें मगज मराइल ए बेरा मे भा कवनों चुरइल समाइल बा. कइसे कहीं कि होरी आइल बा....

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समाचार? सब ठीक बा!

– डॉ० हरीन्द्र ‘हिमकर’ सीमा के पाती, बॉंची जा एह चिठ्ठी में चीख बा। दिल्लीवालन भूल ना जाईं समाचार सब ठीक बा।। धान-पान सब सूख गइल बा खेत-मजूरा चूक गइल बा। पेट-पेट में कोन्हू नाचत हियरा-हियरा हूक गइल बा। घर में...

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