Tag: भोजपुरी

का हो गइल ई देस के भगवान !

– जयंती पांडेय एकदिन एगो नेताजी अपने दुलरुआ बेटा से पूछले – बाबू रे, तें आगे जा के का बने के चाहऽतारऽ ? माने कि जिनिगी में आगे जा के का करे के इरादा बा ? उनुकर बेटा टप दे कहलसि – बाबूजी, हम त आगा चल के नेता...

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डा. प्रभुनाथ सिंह के याद में

आजे का दिन 30 मार्च 2009 के गोंडा का लगे वैशाली एक्सप्रेस में हृदयाघात से डा. प्रभुनाथ सिंह के मौत हो गइल. उहां के दिल्ली से छपरा जात रहनी. ओकरा एके दिन पहिले हमार उहाँ से बातचीत भइल रहे . – ना, अभी हमरा इहां हमार टी वी...

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दास मलूका कह गए सबके दाता राम !

– विकास अजगर करे ना चाकरी पंछी करे न काम, दास मलूका कह गए सबके दाता राम ! चलीं तनी एह जानल सुनल कहावत के व्याख्या कइल जाव. सोचल जाव कि आखिर अजगर चाकरी काहे ना करे, पंछी काम काहे ना कर सँ आ आखिर राम का लगे देबे खातिर अतना...

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दिल्ली में मेहरारुन के दुर्दशा

दिल्ली के भोजपुरी मैथिली अकादमी द्वारा आयोजित नाट्य समारोह में महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन के लिखल भोजपुरी नाटक “मेहरारुन के दुर्दशा” के मंचन करावल गइल. नाटक के एगो पात्र के सवाल रहे, “ऐ यशोधरा जानत हऊ, सनातन...

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फागुन के आसे

– रामरक्षा मिश्र विमल फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई. डर ना लागी बाबा के नवकी बकुली से अङना दमकी बबुनी के नन्हकी टिकुली से कनिया पेन्हि बिअहुती कउआ के उचराई. फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई. फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई....

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