Tag: भोजपुरी

पटना टू पाकिस्तान के बाद अब बारी है “साथियां” की

यह एक बार फिर तय हो गया है कि खलनायक संजय पांडे जिस भी फिल्म में होते हैं वह फिल्म कामयाबी का झंडा जरुर गाड़ती है. संजय पांडे अभिनीत फिल्म ‘पटना टू पाकिस्तान’ इस साल की उनकी सबसे बड़ी कामयाब फिल्म मानी जा रही है जबकि...

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जेएनयू के भारतीय भाषा केन्द्र में भइल परिचर्चा आ काव्यपाठ

“‘पाती’ पत्रिका भोजपुरी रचनाशीलता के आंदोलन के क्रांति-पताका हऽ. ‘पाती’ माने, नयकी पीढ़ी के नाँवे सांस्कृतिक चिट्ठी. एगो चुपचाप चले वाला सांस्कृतिक आंदोलन हवे ‘पाती’, जवना के अशोक द्विवेदी अपना संसाधन से चुपचाप चला रहल...

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भोजपुरी लिखे पढ़े के कठिनाई आ काट

– डा॰ प्रकाश उदय भाषा-विज्ञान में जवना के भाषा कहल जाला, तवना में, जवन कहे के होला, जतना आ जइसे, तवन कहा पाइत ततना आ तइसे, त केहू के ‘आने कि’, ‘माने कि’, ‘बूझि जा जे’ भा ‘जानि जाईं...

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रहे एगो आस रे…

– ओमप्रकाश अमृतांशु डहके मतरिया रे , छछनेली तिरिया, बाबुजी बांधत बाड़न, बबुआ के लाश रे, जिनिगी के जिनिका पे रहे एगो आस रे. ढरकत लोरवा के छोरवा ना लउके, भइल सवार खून माथवा पे छउंके, पारा-पारी सभेके धोआइल जाता मंगिया, बाबुजी...

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‘सूर्पनखा’ का नाक के चलते असों होली ना मनाइब.

– नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती मनबोध मास्टर दुखी मन से कहलें – असों होली ना मनाइब. मस्टराइन पूछली- काहें? ऊ कहलें – सूर्पनखा की नाक की चलते. बात सही बा. जहां-जहां गड़बड़ बा, बूझीं सूर्पनखा के नाक फंसल बा. हम्मन क...

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