Category: साहित्य

बतकुच्चन – ४५

पिछला बेर पोजिटिव थिंकिंग के बात सामने आइल रहुवे से आजु ओहिजे से शुरू करत बानी. पोजिटिव थिंकिंग, माने कि सकारात्मक सोच, माने कि सकारथ सोच ओह सोच के कहल जाला जवन आदमी के मनोरथ पूरा करे, ओकर ईच्छा पूरा करे भा ओकर सोचल सगरी काम...

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ओनइसवीं सदी में बलिया के ददरी मेला : इतिहास क ऐना

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 12वी प्रस्तुति) – आनन्द संधिदूत ओनइसवीं सदी के आखिरी दशक आवत-आवत ददरी के मेला बलिया में एगो दुर्घटना घट गइल. भइल ई कि कातिक के प्रमुख नहान आ बकरीद एके दिन पड़ गइल. नतीजा ई भइल...

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माई के इयाद

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 11वी प्रस्तुति) – मनोकामना सिंह शाम के, घर लवट के अइला पर देख के चेहरा उदास पूछली माधो के मेहरारू रउरा मुँह काहे लटकवले बानीं? बंगला के पाँच अस बनवले बानीं ? कहलें माधो, ”का...

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मुन्नी इयाद करे नानी के

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 10वी प्रस्तुति) – गंगा प्रसाद अरुण नानी हो, बहुते इयाद आवेला तोहार खास करके तब जबकि पापा-मम्मी दूनो लोग चलि जाला अपना-अपना आफिस-स्कूल बन कइके हमनी के ताला में. जानेलू, घर में...

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कवि सम्मेलन आ स्व॰ गणेशदत्त ‘किरण’

(स्मरण – आचार्य गणेशदत्त ‘किरण’) (पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 9वी प्रस्तुति) – रामजी पाण्डेय ‘अकेला’ ‘किरण’ जी का बारे में, हमार छोटकी चाची जे बसाँव के स्व॰ बृजा ओझा के बेटी हई, बतवली कि –...

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